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यह सब एक गाय के साथ शुरू किया

गायों को हर संभव तरीके से मानव जाति की मदद करने के लिए जाना जाता है और यह सच्ची कहानी इस तथ्य का प्रमाण है।

कहानी गुजरात के वलसाड जिले के पार्वती पटेल के बारे में है, जिन्हीने सिर्फ एक गाय के साथ शुरूआत की और उसमें से एक लाभदायक व्यवसाय बनाया। कहानी उस समय से है जब समाज अभी भी एक महिला को एक विजेता के रूप में स्वीकार करने में हिचकिचा रहा थी। यही कारण है कि यह कहानी गायों, सफेद क्रांति के बारे में नहीं, बल्कि महिलाओं को श्रद्धांजलि भी है।

पार्वती पटेल की शादी सोलधारा गांव के एक परिवार में हुई थी और सिर्फ शादी के 6 सालों के अंदर , वह इस तथ्य पर आ गई कि उनका पारिवारिक व्यवसाय टूट रहा है। उनके पति और उनके ससुर जो अपने संयुक्त परिवार की कमाई कर रहे थे, व्यवसाय को चलाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। वित्त के लिए उनके संघर्ष को देखते हुए, पार्वती ने मामले को अपने हाथों में लेने का फैसला किया। और अब वह अपने गांव में महिलाओं और किसानों के लिए एक प्रतीक है।

“पार्वती बताती हैं कि उन्होंने, उनके पास अकेली गाय को दुहना शुरू किया और दूध को उनके गाँव सोलधारा के दूध समाज में डालना शुरू किया”,और यह लगभग 24 साल पहले था। अब वह सोलधारा में दूध समाज की प्रमुख है, जो पूरी तरह से और केवल महिलाओं द्वारा चलाया जाता है। वह वलसाड जिले में 15 से अधिक वर्षों से दूध उत्पादक संघ के निदेशक होने के साथ लगभग 20 वर्षों से इस दूध समाज का नेतृत्व कर रहीं हैं।

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि दूध उत्पादकों के वलसाड संघ की ज्यादातर सदस्य महिला हैं।

“मैंने लगभग 20 साल पहले केवल एक गाय के साथ शुरुआत की और मुझे प्रेरणा इस बात से मिली कि आनंद के आस-पास के जिले में एक और महिला ने 40 गायों के साथ करीब 10 लाख रुपये कमाए हैं। और यहीं मैंने अपने डेयरी फार्म का विस्तार करने पर विचार करना शुरू कर दिया “, पार्वती बताती हैं उन्होंने एक गाय से लगभग 15 हेइफ़र्स और 30 गायों तक विस्तार किया।

वह गर्व से कहती है कि डेयरी उत्पादन में उनके विस्तार ने उन्हें कई तरीकों से मदद की है। वह कहती है, “मेरे सबसे बड़े बेटे को डेयरी तकनीक में डिग्री मिली है, उसने एमआईटी में अध्ययन किया और अब अमेरिका में है। छोटा बेटा अपनी शिक्षा पूरी करने में कामयाब रहा है और अब वलसाड जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में काम कर रहा है। ”

यह न केवल पार्वती के लिए गर्वित उपलब्धि रही है, लेकिन कई महिलाओं के लिए जिन्होंने डेयरी उत्पादन में अपना समय और प्रयास निवेश करके अपने जीवन को बेहतर बनाने में कामयाबी हासिल की है। तथ्यों में, जीसीएमएमएफ (गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन) के अनुसार अमूल भारत में सबसे बड़ा डेयरी ब्रांड् है, जिसमे लाखों से ज्यादा महिलाएँ आधिकारिक तौर पर हर दिन योगदान देती हैं। अकेले गुजरात के डेयरी सेक्टर की अनुमानित कीमत 35000 करोड़ रुपए है। राज्य में लगभग 3000 दूध समाज हैं जो कि अकेले महिलाओं द्वारा पूरी तरह से संचालित है और इस आंकड़े की हर दिन वृद्धि हो रही है।

जीसीएमएमएफ के निदेशक के शब्दों के अनुसार, “हमारे पास पंजीकृत 10 लाख सदस्य (महिला) हैं, और इससे भी अधिक डेयरी में हर दिन योगदान कर रहीं हैं। इनमें से अधिकतर महिलाएं सिर्फ डेयरी दूध प्रदान करने वाली नहीं बल्कि उससे भी ज्यादा हैं क्योंकि वे इस क्षेत्र के विकास में योगदान कर रही हैं। ”

भारत दुनिया में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश है, और गुजरात ने इस क्रांति को पाला है, इसलिए वहां अधिक से अधिक सफलता की कहानियाँ हैं। गायों ने निश्चित रूप से हमारे जीवन को बेहतर बना दिया है और वे ऐसा करती रहेंगी। आइए हम उनकी सहायता करें और उन्हें बचाएं ताकि वो हमारी सहायता कर सकें।

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